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प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों पर अंकुश न लगाया जाए : एमपीसीसीआई कोरोना के बढते प्रभाव के कारण शासन एवं प्रशासन द्बारा लगाई गई पाबंदियों से आर्थिक गतिविधियों के बुरी तरह प्रभावित होने के चलते एमपीसीसीआई ने मुख्यमंत्री-श्री शिवराज सिंह चौहान, केन्द्रीय मंत्री-श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, राज्यसभा सदस्य एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री-श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया, गृहमंत्री-डॉ. नरोत्तम मिश्रा, ऊर्जा मंत्री-श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर एवं सांसद-श्री विवेक नारायण शेजवलकर को लिखा पत्र ग्वालियर २७ मार्च| म.प्र. चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री (एमपीसीसीआई) द्बारा कोरोना के बढते प्रभाव के कारण शासन एवं प्रशासन द्बारा लगाई गई पाबंदियों से आर्थिक गतिविधियों के बुरी तरह प्रभावित होने के चलते मुख्यमंत्री-श्री शिवराज सिंह चौहान, केन्द्रीय मंत्री-श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, राज्यसभा सदस्य एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री-श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया, गृहमंत्री-डॉ. नरोत्तम मिश्रा, ऊर्जा मंत्री-श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर एवं सांसद-श्री विवेक नारायण शेजवलकर को पत्र प्रेषित किये गये हैं| एमपीसीसीआई अध्यक्ष-विजय गोयल, संयुक्त अध्यक्ष-प्रशांत गंगवाल, उपाध्यक्ष-पारस जैन, मानसेवी सचिव-डॉ. प्रवीण अग्रवाल, मानसेवी संयुक्त सचिव-ब्रजेश गोयल एवं कोषाध्यक्ष-वसंत अग्रवाल द्बारा प्रेस को जारी विज्ञप्ति में अवगत कराया गया है कि कोरोना की एक महाबीमारी के रूप में पूरी दुनिया में पहचान रही है और भारत वर्ष में इसको एक वर्ष पूर्ण होकर यह दूसरा वर्ष है| प्रथम वर्ष में न तो इस बीमारी से कोई परिचय था और न ही कोई वैक्सीन थी| परिणामत: लॉकडाउन ही एक मात्र सहारा था, जिस पर माननीय मुख्यमंत्री के कुशल नेतृत्व में मध्यप्रदेश को न्यूनतम जनहानि के साथ इस महाबीमारी का हमने सामना भी किया और जब-जब जो निर्णय शासन द्बारा लिये गये उसमें पूर्णत: सहभागिता भी की| वर्तमान में कोरोना का द्बितीय चरण प्रारंभ हुआ है और उसकी गति भी तीव्र हुई है लेकिन सुखद पहलू यह है कि अब हमें इससे निपटने का अनुभव भी आ गया है और वैक्सीनेशन में भी दुनिया में हमने उल्लेखनीय स्थान प्राप्त किया है| पिछले साल कोरोना में लगभग ७५ दिन से भी ज्यादा लॉकडाउन की वजह से उद्योगपति, व्यापारी, श्रमिक, दैनिक वेतन भोगी और दिहाड़ी मजदूरों पर इसका आर्थिक रूप से बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ा था जिससे वह आज तक उबर नहीं पाये हैं| ऐसी स्थिति में अगर हम ऐसे निर्णय लेंगे जिससे इन गतिविधियों पर बंदिश रहेगी तो अबकी बार जो आर्थिक मार इस वर्ग पर पड़ेगी तो उससे बहुत असमंजस की स्थिति होगी वह तय नहीं कर पायेगा कि इन्हें मानें, इन्हीं नहीं मानने के लिए लड़े, या मिट जाये, जिसकी वजह से हमारे प्रदेश की जो आर्थिक स्थिति है वह भी प्रभावित होगी| वहीं इन्हीं कारणों से प्रदेश में आपराधिक ग्राफ में भी तेजी से वृद्घि होगी| पिछले कोरोना काल से हमने यह सबक सीखा है कि मास्क इससे बचाव का एक बेहतर विकल्प है जिससे हम कोरोना से स्वयं बच सकते हैं व दूसरों को बचा भी सकते हैं| जब-जब माननीय मुख्यमंत्री जी द्बारा एवं उनके द्बारा निर्देशित विभिन्न जिलों की क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटियों द्बारा बंदिशें लगाये जाने के निर्णय लिये जाते हैं उसके पालन में पूरी सरकारी मशीनरी लग जाती है तब जाकर उसका पालन संभव हो पाता है| एमपीसीसीआई ने पत्र के माध्यम से निम्नलिखित सुझाव प्रेषित किए हैं:- १. मास्क ही बचाव है तो जो सरकारी मशीनरी हम बंदिशों का पालन करवाने के लिए लगाते हैं वह पूरी मशीनरी, जनप्रतिनिधि, राजनीतिक दल, सामाजिक-व्यवसायिक संगठनों से आव्हान करके हम कड़ाई से मास्क पहनाना सुनिश्‍चित करें, जिससे लॉकडाउन का निर्णय लेना ही नहीं पड़ेगा| २. पिछले कोरोना काल में एक माह के लिए ही विवाह के मुहूर्त थे और कोरोना की बंदिशों के कारण वैवाहिक कार्यक्रम संपन्न नहीं हो सके थे| इसके विपरीत यह बात भी तय है कि जब-जब विवाह के मुहूर्त होते हैं, तब-तब व्यापार-उद्योग बहुत तेजी से प्रगति करते हैं| एक वर्ष बाद जून माह तक पुन: विवाह मुहूर्त २३ अप्रैल से प्रारंभ होने जा रहे हैं, ऐसी अवस्था में वैवाहिक कार्यक्रम में अधिकतम ५० व्यक्तियों की संख्या निर्धारित करना, यह सबसे बड़ा आर्थिक गतिविधियों के लिए बाधा वाला निर्णय है| इसके विपरीत मंडियों में, अस्पतालों में, सरकारी रेवेन्यू कार्यालयों में, जनप्रतिनिधियों के मुख्यातिथ्य में होने वाले सामाजिक कार्यक्रमों में इससे अधिक संख्या में भीड़ इकट्ठी होती है| इसलिए हम इस पर पुनर्विचार करते हुए कोविड-१९ के सुरक्षा के उपाय की बाध्यता के साथ मैरिज गार्डन व उसमें खुले मैदान की क्षमता का ५०% की अनुमति प्रदान की जाना चाहिए और इसका कड़ाई से पालन हो यह सुनिश्‍चित करने का भी निर्णय लिया जाना चाहिए| ३. जिम, सिनेमा, कोचिंग, स्विमिंग पूल जो विगत १०-११ माह बंद रहे हैं| वह कुछ दिवस पूर्व ही ५० प्रतिशत क्षमता के साथ प्रारंभ हुए थ| अब पुन: इन्हें बंद करने का निर्णय लिया गया है| इन व्यवसाय से लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है| यदि इन्हें फिर लंबे समय तक के लिए बंद किया गया तो यह इण्डस्ट्री पूरी तरह खत्म हो जायेगी, जिसके दूरगामी परिणाम बहुत घातक होंगे| इसलिए जिम, सिनेमा, कोचिंग, स्विमिंग पूल को भी ५० प्रतिशत क्षमता के साथ खोलने का निर्णय लिया जाना चाहिए| ४. शहर के अंदर यदि किसी एक विशेष दिन हम लॉकडाउन लगाते हैं तो उस शहर में साप्ताहिक अवकाश नहीं रहेगा इसका भी स्पष्ट उल्लेख करना चाहिए| ५. किसी भी शहर में एक दिन से ज्यादा दिन के लिए लॉकडाउन का निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए| ६. कोरोना के जो पॉजिटिव मरीज निकल रहे हैं उनकी हिस्ट्री को संकलित कराकर हमारे प्रदेश में कोरोना फैलने के प्रमुख कारण को रेखांकित किया जाना चाहिए| जहां तक हमारे द्बारा जानकारी के आधार पर जो निष्कर्ष लिया गया है उसके मुताबिक एक राज्य से दूसरे राज्य, एक शहर से दूसरे शहर व एक देश से दूसरे देश जाने के कारण कोरोना के ग्राफ में वृद्घि हुई है| अगर यह जानकारी कोरोनों मरीजों की हिस्ट्री से निकलकर आती है तो एक राज्य से दूसरे राज्य, एक शहर से दूसरे शहर व एक देश से दूसरे देश जाने पर बंदिशें लगाई जाना चाहिए| ७. इसके साथ ही एक निर्णय पूरे प्रदेश के लिए यह लिया जा सकता है कि रात्रि में बाजार (मेडिकल, खानपान, इमरजेंसी सेवायें को छोड़कर) ९ बजे बंद कर दिये जायें| ८. एक महत्वपूर्ण सुझाव यह भी है कि मुख्यमंत्री जी स्वयं वेबिनार के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक, व्यापारिक एवं सामाजिक संगठनों से उनकी परेशानियां व उनके सुझावों को जानें, जिससे प्रदेश के हित में बेहतर निर्णय लिया जा सके|

ग्वालियर व्यापार मेला में वाहनों पर आरटीओ शुल्क में 50% छूट की अवधि 15 अप्रैल तक की जाए ः एमपीसीसीआई प्रदेश के मुख्यमंत्री-माननीय श्री शिवराज सिंह चौहान, केन्द्रीय मंत्री-माननीय श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, सांसदद्वय-माननीय श्रीमंत ज्योतिरादित्य जी सिंधिया एवं माननीय श्री विवेकनारायण शेजवलकर सहित परिवहन व राजस्व मंत्री, म. प्र. शासन-माननीय श्री गोविन्द सिंह राजपूत को लिखे पत्र ग्वालियर, 27 मार्च । ग्वालियर व्यापार मेला को जिला प्रशासन द्वारा कोरोना महामारी के बढ़ते प्रभाव के कारण बंद किए जाने के आदेश जारी किए जाने का एमपीसीसीआई द्वारा विरोध करते हुए, आज प्रदेश के मुख्यमंत्री-माननीय श्री शिवराज सिंह चौहान, केन्द्रीय मंत्री-माननीय श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, सांसदद्वय-माननीय श्रीमंत ज्योतिरादित्य जी सिंधिया एवं माननीय श्री विवेकनारायण शेजवलकर सहित परिवहन व राजस्व मंत्री, म. प्र. शासन-माननीय श्री गोविन्द सिंह राजपूत को पत्र लिखकर माँग की है कि * वाहनों की दि. 15 अप्रैल तक के विक्रय पर 50% की छूट प्रदान की जाए । इस आशय का संशोधित आर.टी.ओ. संबंधी आदेश प्रसारित किया जाए । * मेले को सेक्टर वाइज बंद करने के लिए जिला प्रशासन को निर्देशित किया जाए । * जो दुकानदार मेला में दि. 15 अप्रैल से पूर्व अपना व्यवसाय समेटते हैं, उन्हें उनके 15 अप्रैल तक के किराए एवं बिजली के बिल की राशि आनुपातिक रूप से उनको वापिस की जाए अथवा आगामी वर्ष की बुकिंग में समायोजित किए जाने संबंधी आदेश जारी किए जाएँ । एमपीसीसीआई, अध्यक्ष-विजय गोयल, संयुक्त अध्यक्ष-प्रशांत गंगवाल, उपाध्यक्ष-पारस जैन, मानसेवी सचिव-डॉ. प्रवीण अग्रवाल, मानसेवी संयुक्त सचिव-ब्रजेश गोयल एवं कोषाध्यक्ष-वसंत अग्रवाल ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति मे कहा है कि पूर्व में म. प्र. परिवहन विभाग द्वारा मेला अवधि दि. 15 अप्रैल,21 तक ग्वालियर व्यापार मेला से क्रय किए जाने वाले वाहनों को आरटीओ शुल्क में 50% की छूट दिए जाने के आदेश जारी किए गए थे । उक्त आदेश को ध्यान में रखते हुए ग्वालियर वासियों द्वारा विभिन्न प्रकार के वाहन बुक किए गए हैं और उन वाहनों की डिलेवरी आगामी 15 अप्रैल तक होने वाली है । बावजूद इसके मेला को 28 मार्च से बंद किए जाने का आदेश समझ से परे है । पदाधिकारियों ने कहा है कि यह बात सही है कि कोरोना के द्वितीय लहर का प्रभाव बढ़ रहा है, लेकिन सकून इस बात का है कि अब यह महामारी अपरिचित नहीं है । इसके बारे में हमारे डॉक्टर और आमजन परिचित हुए है । यह भी सही है कि कोरोना कभी खत्म होने वाला नहीं है । अब हमें कोरोना के साथ ही जीना सीखना है और यदि इस द्वितीय लहर की कोरोना में मृत्यु की डेथ ऑडिट करवाएँगे, तो और बेहतर निष्कर्ष पर हम पहुँच सकते हैं । एमपीसीसीआई द्वारा भेजे गए पत्रों में उल्लेख किया गया है कि ग्वालियर व्यापार मेला को लेकर प्रारम्भ में चूंकि यह घोषणा की गई थी कि मेला अवधि दो माह की होगी, यानि की दि. 15 अप्रैल,21 तक की रहेगी । कोरोना की द्वितीय लहर को ध्यान में रखते हुए, जब जिलाधीश द्वारादि. 22 मार्च को जिला क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटी की बैठक आयोजित की गई, जिसमें संस्था के मानसेवी सचिव-डॉ. प्रवीण अग्रवाल उपस्थित थे । उक्त बैठक में यह तय हुआ था कि व्यापारियों के हितों को संरक्षित करते हुए, मेला को चरणबद्ध तरीके से बंद किया जाएगा, परन्तु जो आदेश जारी हुआ है, उसमें सेक्टर वाइज बंद न करते हुए सम्पूर्ण मेला को बंद करने का उल्लेख है । जबकि वास्तविक स्थिति यह है कि कई सेक्टर के व्यवसाई ऐसे हैं, जिनकी दुकानें अथवा शोरूम कुछ दिवस पूर्व ही तैयार हुए हैं । इसलिए मेला को चरणबद्ध रूप में बंद किया जाना आवश्यक है । पदाधिकारियों ने कहा है कि, ग्वालियर व्यापार मेला में आरटीओ छूट का जो आदेश निकाला गया है, उसमें मेला अवधि का उल्लेख करते हुए, मेला अवधि तक छूट दिए जाने का उल्लेख है और माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा मेला उद्घाटन के अवसर पर इसकी अवधि निर्धारित की गई थी, वह 15 फरवरी से 15 अप्रैल,21 तक थी । अतः जिन लोगों को वाहन की आवश्यकता है, उन्होंने 15 अप्रैल तक के वाहनों की उपलब्धता के आधार पर अपनी बुकिंग कराई है । अतः इस आदेश में मेला अवधि के स्थान पर दि. 15 अप्रैल तक के बिके वाहनों पर 50% आरटीओ की छूट का उल्लेख करते हुए आदेश निकाले जाने की आवश्यकता है ।

होली के त्यौहार को लेकर क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटी की बैठक आयोजित एमपीसीसीआई की ओर से मानसेवी सचिव-डॉ. प्रवीण अग्रवाल हुए बैठक में शामिल ग्वालियर २७ मार्च| म.प्र. चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री (एमपीसीसीआई) की ओर से क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटी की बैठक ऑनलाइन आयोजित की गई है| बैठक में मानसेवी सचिव-डॉ. प्रवीण अग्रवाल ने कहा कि कोरोना महामारी से हम पिछले एक साल से संघर्ष कर रहे हैं और हमें इस कोरोना के साथ ही अपना जीवनयापन करना है| इसलिए आवश्यक है कि कोरोना के कारण आर्थिक गतिविधियों को नहीं रोका जाये| आपने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री जी ने ‘मेरा मास्क-मेरी सुरक्षा’ का जो मंत्र दिया है और विशेषज्ञों का भी कहना है कि मास्क लगाने से कोरोना से बचा जा सकता है इसलिए जिस प्रकार प्रशासन एवं पुलिस महकमा लॉकडाउन को प्रभावी बनाने के लिए मेहनत करता है, उसी प्रकार यदि हम सब मिलकर यह तय कर लें कि कोई भी व्यक्ति बिना मास्क के नहीं रहेगा तो शहर में लॉकडाउन की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी| इससे हम कोरोना से नागरिकों का न केवल बचाव कर सकते हैं बल्कि शहर की आर्थिक गतिविधियों को भी सुचारू रख सकते हैं| इससे लोगों का जीवन भी बचेगा वहीं रोजगार व व्यापार पर भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं होगा आपने बैठक में कहा कि रंगों के त्योहार होली के लिए छोटे व्यापारी व ठेला चलाकर अपना गुजारा करने वाले व्यक्ति रंगों व पिचकारियों का सामान कर्ज लेकर आते हैं और इसे विक्रय कर अपना जीवनयापन करते हैं| रविवार के दिन प्रशासन द्बारा लॉकडाउन की घोषणा करने से इन व्यक्तियों का आर्थिक नुकसान होगा और शहरवासियों को भी परेशानी होगी| इसलिए आवश्यक है कि रंग-गुलाल, पिचकारी, नमकीन, मिठाई, बेकरी, फल, दूध, सब्जी आदि खाद्य पदार्थों की दुकानों को रविवार को खोला जाए| इससे लोग सोमवार के दिन होली का त्यौहार घर पर आसानी से मना सकेंगे| आपने सुझाव दिया कि ग्वालियर व्यापार मेला में दुकानदारों को अपना सामान समेटने के लिए ३१ मार्च तक की छूट दी जाना चाहिए| इसके साथ ही यदि वाहनों के पंजीयन शुल्क में ५०% की छूट भी शासन प्रदान करे तो बेहतर होगा| इससे शादियों के लिए वाहन लेने वालों को फायदा होगा और शासन को भी राजस्व की प्राप्ति होगी| आपने कहा कि प्रशासन द्बारा शादियों में लोगों की संख्या को अभी से ही सीमित कर दिया गया है जबकि शादियों का सीजन २३ अप्रैल से प्रारंभ होगा| प्रशासन द्बारा शादी में मेहमानों की संख्या अभी से ही तय करने से जिन घरों में शादियां हैं, वह परेशान हैं| इसके साथ ही मैरिज गार्डन संचालक, हलवाई, बैण्ड वाले, शादी से जुड़ी वस्तुओं का व्यापार करने वाले एवं इन शादियों में श्रमिक के रूप में अपनी सेवायें देने वाले भी अपनी आजीविका को लेकर मानसिक रूप से परेशान हैं| विगत वर्ष भी लॉकडाउन होने से शादियों से जुड़ा कारोबार करने वाले व्यापारियों का व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ था और उन्हें बहुत नुकसान उठाना पड़ा था| मैरिज गार्डन संचालकों को तो बुकिंग की राशि वापिस करनी पड़ी थी और वह कर्ज में डूब गये थे| इस वर्ष भी यदि ऐसा ही हुआ तो यह लोग बर्वाद हो जायेंगे| इसलिए आवश्यक है कि शादियों के लिए गाइडलाइन बनाने से पूर्व उस समय कोरोना की स्थिति को लेकर निर्णय लिया जाना चाहिए| आपने बैठक में सुझाव दिया कि आज की बैठक में केवल होली के त्यौहार को लेकर गाइडलाइन शहरवासियों की सुविधा एवं सुरक्षा को देखते हुए निर्धारित करें तथा होली के त्यौहार के अगले दिन यानि मंगलवार को कलेक्टर सभागार में पुन: क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटी की बैठक ऑनलाइन नहीं समक्ष में बुलाएं ताकि कई लोग सिग्न आदि न मिलने के कारण बैठक में शामिल नहीं हो पा रहे हैं वह अपनी बात समक्ष में उपस्थित होकर रख सकें|

एक हजार किलोवाट तक के सोलर संयंत्र पर नेट मीटरिंग का लाभ दिया जाए : एमपीसीसीआई केन्द्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)-श्री आर.के. पुरी जी एवं राज्यसभा सदस्य-श्रीमंत ज्योतिरादित्य जी सिंधिया को लिखा पत्र ग्वालियर 24 मार्च| म.प्र. चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री (एमपीसीसीआई) द्बारा इलेक्ट्रिसिटी(राइट्स ऑफ कंज्यूमर्स) रूल्स 2020 जो कि 31 दिसम्बर,2020 को अधिसूचित किये गये हैं| इसके नियम 11(4) में दिये गये प्रावधान के संबंध में केन्द्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)-श्री आर.के. पुरी एवं राज्यसभा सदस्य-श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया जी को पत्र प्रेषित किया गया है| एमपीसीसीआई अध्यक्ष-विजय गोयल, संयुक्त अध्यक्ष-प्रशांत गंगवाल, उपाध्यक्ष-पारस जैन, मानसेवी सचिव-डॉ. प्रवीण अग्रवाल, मानसेवी संयुक्त सचिव-ब्रजेश गोयल एवं कोषाध्यक्ष-वसंत अग्रवाल द्बारा प्रेस को जारी विज्ञप्ति में अवगत कराया गया है कि भारत सरकार द्बारा इलेक्ट्रिसिटी(राइट्स ऑफ कंज्यूमर्स) रूल्स 2020 जो कि 31 दिसम्बर,2020 को अधिसूचित किये गये हैं| इसके नियम 11(4) में दिये गये प्रावधान के संबंध में निम्नानुसार आपत्ति/सुझाव पत्र के माध्यम से प्रेषित किये गये हैं:- 1. यह कि, उक्त नियम में छत पर 10 किलोवाट क्षमता तक का सोलर संयंत्र लगाने पर नेट मीटरिंग का लाभ दिया जाना प्रस्तावित किया गया है, जबकि इससे अधिक क्षमता के सोलर संयंत्र पर इसका लाभ नहीं दिया जायेगा| 2. यह कि, केन्द्र द्बारा ‘‘आत्मनिर्भर’’ बनने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जबकि उक्त प्रस्तावित संशोधन उपभोक्ताओं को बिजली कंपनी पर निर्भर करने के लिए प्रोत्साहित करता है| 3. यह कि, सरकार द्बारा सोलर एनर्जी को बढावा देने के लिए निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं ताकि देश के सीमित संसाधनों पर हमारी निर्भरता कम हो सके| जहां एक ओर देश में पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रचलन बढाने के लिए प्रयास किया जा रहा है, वहीं विद्युत की खपत को कम करने के लिए सोलर एनर्जी के प्रयोग को बढाने के प्रयास भारतवर्ष में किये जा रहे हैं, लेकिन उक्त प्रावधान से इस पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा| 4. सोलर संयंत्र मुख्यत: बहुमंजिला इमारतों, वाणिज्यिक संस्थाओं एवं औद्योगिक इकाईयों द्बारा लगाये जाते हैं, ताकि एकमुश्त निवेश कर ऊर्जा जरूरतों पर लगने वाली लागत को कम किया जा सके| वहीं उत्पादित विद्युत को वितरण कंपनी को विक्रय कर विद्युत बिल में भी राहत मिल सके| 5. यह कि 10 किलोवाट क्षमता तक नेट मीटरिंग का लाभ दिये जाने का प्रावधान बहुमंजिला इमारतों, वाणिज्यिक संस्थाओं एवं औद्योगिक इकाईयों द्बारा नये सोलर संयंत्र स्थापित करने में अवरोधक का कार्य करेगा| एमपीसीसीआई द्बारा पत्र के माध्यम से मांग की गई है कि विद्युत पर निर्भरता को कम करने तथा सोलर ऊर्जा के प्रयोग को बढावा देने के लिए आवश्यक है कि प्रस्तावित संशोधन को समाप्त कर, 1000 किलोवॉट तक के सोलर संयंत्र पर नेट मीटरिंग का लाभ उपभोक्ताओं को प्रदान किया जाये, ताकि माननीय प्रधानमंत्री की मंशा अनुरूप हम ‘‘आत्मनिर्भर भारत’’ की ओर कदम बढा सकें|

एमपीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष, स्व. श्री गोविन्ददास अग्रवाल जी के निर्वाण पर व्यापार-उद्योगजगत् ने ‘चेम्बर भवन’ में अर्पित किए श्रद्धासुमन ग्वालियर, 23 मार्च । एमपीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष, स्व. श्री गोविन्ददास अग्रवाल जी के निधन पर आज, सायं 4.00 बजे श्रीयुत् डी. पी. मण्डेलिया सभागार (चेम्बर भवन) में विनम्र श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया । श्रद्धांजलि सभा में प्रदेश के ऊर्जा मंत्री-माननीय श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर सहित शहर के अनेक व्यवसायिक संगठनों के पदाधिकारियों व उद्योगपतियों ने उपस्थित होकर, एमपीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष, स्व. श्री गोविन्ददास जी अग्रवाल को श्रद्धासुमन अर्पित किए । श्रद्धांजलि सभा में प्रदेश के ऊर्जा मंत्री-माननीय श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर द्वारा एमपीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष, स्व. श्री गोविन्ददास जी अग्रवाल को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहाकि परम् श्रद्धेय स्व. श्री गोविन्ददास जी अग्रवाल को मैं, नमन करता हूँ । मैने, उन्हें व्यापारी व समाजसेवी के रूप में सदैव देखा है । मैंने उनमें कभी हताशा नहीं देखी । ऐसे महान व्यक्ति को मैं सादर प्रणाम करता हूँ-नमन करता हूँ । एमपीसीसीआई, अध्यक्ष-श्री विजय गोयल ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहाकि जब भी कोर्ई अपना बिछड़ता है, तो विछोह के दुःख का सामना हमें करना ही पड़ता है, परन्तु हमें, परम आदरणीय स्व. श्री गोविन्ददास जी अग्रवाल द्वारा बताए गए रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए और व्यापारिक-औद्योगिक समाज सहित सभी वर्ग के कल्याण के लिए सदैव कार्य करना चाहिए । आपने कहाकि आज एक महान् आत्मा हमारे बीच नहीं है । ईश्‍वर हम सभी को उनके विछोह का दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें, यही मेरी परम् पिता परमेश्‍वर से कामना है । पूर्व अध्यक्ष-डॉ. वीरेन्द्र कुमार गंगवाल ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहाकि स्व. श्री गोविन्ददास जी अग्रवाल अपने आचरण से काफी जुझारू थे । वह किसी भी संकट से निपट लेते थे । उनका सदैव अपनत्व मिलता था । हमारे एवं उनके परिवार का समन्वय सदैव रहा है । पूर्व उपाध्यक्ष-श्री जी. एल. भोजवानी ने कहाकि आज बहुत ही दुःखद अवसर है । आज यह महसूस करना कि वह हमारे बीच नहीं है, बहुत ही मुश्किल हो रहा है । ग्वालियर में उन्हें सदैव बड़े ही आदर से याद किया जाएगा । दाल बाजार व्यापार समिति के सचिव-श्री मनीष बांदिल ने कहाकि मुझे चाचा जी से काफी कुछ सीखने को मिला है । वह व्यापारियों सहित मजदूरों के भी काफी हमदर्द थे । दी ग्वालिरर होलसेल क्लॉथ मर्केन्टाइल एसोसिएशन के सचिव-श्री विजय जाजू ने कहाकि स्व. श्री गोविन्ददास जी अग्रवाल कभी भी किसी को छोटा नहीं समझते थे और वह सभी से काफी स्नेह के साथ व्यवहार करते थे । लोहिया बाजार एसोसिएशन के अध्यक्ष-श्री संजय कट्ठल ने कहाकि वह सभी को बराबर का आदर देते थे । एमपीसीसीआई के संयुक्त अध्यक्ष-प्रशांत गंगवाल ने अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहाकि मेरे व मेरे परिवार के बीच काफी स्नेह रहा है । मेरे पूज्य पिताजी और आदरणीय स्व. श्री गोविन्ददास अग्रवाल जी के मध्य काफी घनिष्टता थी । हमारे परिवारों के मध्य स्नेह आगे भी सदैव बना रहेगा, इसका मुझे विश्‍वास है । मैं, हृदय के अन्तःकरण से अपनी व अपने परिवार की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ । उपाध्यक्ष-पारस जैन ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहाकि वह मेरे मार्गदर्शक थे । उन्होंने प्रत्येक कर्त्तव्य व दायित्व का पूरी जिम्मेदारी से सफलता पूर्वक निर्वाहन किया । वह व्यापारियों के काफी हितेशी थे । उनकी क्षतिपूर्ति संभव नहीं है । श्रद्धांजलि सभा में मानसेवी संयुक्त सचिव-ब्रजेश गोयल, कोषाध्यक्ष-वसंत अग्रवाल सहित श्री अचलेश्‍वर ट्रस्ट के अध्यक्ष-श्री हरिदास अग्रवाल, कांग्रेस के प्रदेश सचिव-श्री दुष्यंत साहनी, मेला व्यापारी संघ के सचिव-श्री महेश मुदगल, दाल बाजार व्यापार समिति के पूर्व अध्यक्ष-श्री महेन्द्र साहू, चेम्बर के पूर्व मानसेवी संयुक्त सचिवद्वय-श्री जगदीश मित्तल एवं डॉ. प्रकाश अग्रवाल सहित काफी संख्या में व्यवसाई एवं उद्योगपतियों ने अपनी वाणी से श्रद्धांजलि अर्पित की । श्रद्धांजलि सभा का संचालन, मानसेवी सचिव-डॉ. प्रवीण अग्रवाल द्वारा किया ।

एमपीसीसीआई में सम्पत्ति कर शिविर आयोजित निगम के खजाने में जमा हुए 27 लाख 50 हजार रूपये ग्वालियर 23 मार्च| म.प्र. चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री (एमपीसीसीआई) द्बारा आज सम्पत्ति कर शिविर का आयोजन ‘चेम्बर भवन’ में प्रात: 11 बजे से 1.00 बजे तक किया गया| शिविर में मुख्य अतिथि के रूप में नगर निगम आयुक्त-श्री शिवम वर्मा, अपर आयुक्त-श्री मुकुल गुप्ता, उपायुक्त एवं प्रभारी संपत्ति कर-श्री जगदीश अरोरा, सहायक संपत्ति कर अधिकारी-श्री महेश पाराशर व विभिन्न वार्डों के कर संग्राहक उपस्थित रहे| शिविर के प्रारंभ में पदाधिकारियों द्बारा अतिथिगणों का बुके द्बारा स्वागत किया गया| इस अवसर पर एमपीसीसीआई अध्यक्ष-विजय गोयल ने सभी का हार्दिक स्वागत करते हुए कहा कि व्यापारी एवं उद्योगपतियों व आमजन की सुविधा हेतु यह शिविर लगाया गया है| आपने कहा कि कोरोना महामारी का प्रकोप फिर से बढ रहा है इसलिए हमें प्रदेश के मुख्यमंत्री जी के संदेश का पालन करते हुए होली घर पर ही मनानी है और मास्क आवश्यक रूप से पहनना है| साथ ही, अपने परिजनों व परिचितों को भी मास्क पहनने के लिए प्रेरित करना है| मानसेवी सचिव-डॉ. प्रवीण अग्रवाल ने कहा कि आज इस शिविर में सभी आगन्तुक मास्क पहने यह हमने सुनिश्‍चित किया है| इस अवसर पर आपने निगमायुक्त महोदय से आग्रह किया कि संपत्ति कर जमा करने के साथ ही संपत्ति कर से जुड़ी समस्याओं का समाधान भी शिविर में करने के निर्देश संबंधितों को प्रदान करें ताकि करदाताओं की संपत्ति कर से जुड़ी समस्याओं का भी निराकरण हो सके| इस अवसर पर नगर निगम आयुक्त-श्री शिवम वर्मा ने कहा कि इस शिविर का उद्देश्य संपत्ति कर जमा कराना तो है ही, लेकिन करदाताओं की समस्याओं का समाधान करना भी हमारा दायित्व है| ऐसी समस्याएं जिनका निराकरण शिविर में संभव हो सकेगा उन्हें यहीं पर निराकृत किया जायेगा और जो शेष रहेंगी उनका समाधान कार्यालय में प्राथमिकता से किया जायेगा| आपने शिविर के आयोजन के लिए म.प्र. चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री को धन्यवाद दिया| साथ ही, कोरोना के केस बढने पर आपने शहरवासियों से मास्क आवश्यक रूप से पहनने तथा माननीय मुख्यमंत्री जी द्बारा ‘‘मेरा घर, मेरी होली - मेरा जीवन मेरा मास्क‘‘ अभियान को आत्मसात करने की अपील की| शिविर में 27 लाख 50 हजार रूपये का राजस्व नगर निगम को प्राप्त हुआ| साथ ही संपत्ति कर से जुड़ी कई समस्याओं का निराकरण मौके पर ही किया गया| शिविर में एमपीसीसीआई के संयुक्त अध्यक्ष-प्रशांत गंगवाल, कोषाध्यक्ष-वसंत अग्रवाल सहित काफी संख्या में व्यापारी एवं उद्योगपति उपस्थित रहे|

क्राइसिस मैनेजमेंट की बैठक में मानसेवी सचिव-डॉ. प्रवीण अग्रवाल हुए शामिल ग्वालियर, 22 मार्च । क्राइसिस मैनेजमेंट की आज प्रातः 11.00 बजे कलेक्ट्रेट में आयोजित बैठक को प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री-श्री शिवराज सिंह चौहान ने संबोधित करते हुए सर्वप्रथम बढ़ते हुए कोरोना पर चिंता जताई और अपील की कि कल से सुबह 11.00 बजे एवं सायं 7.00 बजे जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी सड़क पर खड़े होकर मास्क लगाने के लिए जनसाधारण को प्रेरित करें एवं स्वयं भी मास्क लगाएं एवं अपनी-अपनी सेल्फी सोशल मीडिया पर वायरल करें, ताकि समाज में एक संदेश जाएगा । वहीं वीडियो कॉन्फ्रेंस में जब एमएसएमई मंत्री एवं ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष-माननीय श्री ओमप्रकाश सखलेचा ने ग्वालियर मेला पर मार्गदर्शन करने को कहा, तो उन्होंने कहाकि जहाँ 20 से अधिक पैसेंट रोज आ रहे हैं । वहाँ पर किसी प्रकार के मेला की अनुमति नहीं दी जा रही है । इसलिए ग्वालियर मेला पर गंभीरता से विचार कर वहाँ के जनप्रतिनिधि व क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटी निर्णय लें । उसके बाद वीडियो कॉन्फ्रेंस समाप्त होने के बाद क्राइसिस मैनेजमेंट की बैठक हुई । बैठक में कलेक्टर महोदय ने ऊर्जा मंत्री-माननीय श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को बताया कि व्ही.सी. प्रारम्भ होने से पूर्व क्राइसिस मैनेजमेंट के उपस्थित सदस्यों ने यह निर्णय लिया है कि ग्वालियर मेला को 27 मार्च से बंद किया जाए । इस पर एमपीसीसीआई के मानसेवी सचिव-डॉ. प्रवीण अग्रवाल ने आपत्ति उठाते हुए कहाकि मीटिंग व्हीसी के बाद होनी थी और वह व्हीसी के पूर्व ही आयोजित हो गई और उसमें वह उपस्थित नहीं थे । इसलिए वह इस निर्णय से सहमत नहीं हैं । उन्होंने कहाकि यह बात सही है कि जीवन की रक्षा सर्वोपरि है और फिर चाहे जीवन की रक्षा के लिए हमें कोई भी कदम उठाना पड़े, तो हम उसमें प्रशासन का सहयोग करेंगे, लेकिन कोई भी निर्णय लेने से पहले उसके व्यवहारिक पहलूओं पर गंभीर चिन्तन होना चाहिए । उन्होंने कहाकि कोरोना से बचाव का प्रमुख साधन मास्क और भीड़ पर नियंत्रण है । यदि ग्वालियर मेला को बंद करने का निर्णय ले भी लेते है, तब क्या भीड़ पर नियंत्रण हो जाएगा । यह सुनिश्‍चित होना चाहिए क्योंकि मण्डियों एवं बसों सहित कई अन्य जगह काफी भीड़ उमड़ रहीं है, उसे भी ध्यान रखा जाना चाहिए । व्यापार मेला की बात हम बार-बार इसलिए कर रहे हैं कि व्यापारी प्रशासन के लिए सॉफ्ट टारगेट होता है । आपने कहाकि समाचार-पत्रों में कोरोना पोजीटिव निकलने वालों की जो हिस्ट्री आ रही है, उसमें ज्यादातर पोजीटिव जो बाहर से यात्री आ रहें है, उसकी वजह से वह पॉजीटिव हो रहे हैं । कोरोना पॉजीटिव का हमारे पास डाटा है, उनमें से पाँच दिन के 10-10 पॉजीटिव से बात कर उनकी हिस्ट्री को संकलित करना चाहिए और जो कारण कॉमन रूप से निकल कर आएं, उनको चाकचोबंद करना चाहिए । अगर इस कॉमन कारण में ग्वालियर मेला निकलता है, तब इस पर निर्णय लिया जाना चाहिए । वहीं खासकर उन एरिया में जहाँ भीड़ एकत्रित होती है, वहाँ मास्क पर बहुत अधिक जोर दिया जाना चाहिए, जिसके लिए प्रशासनिक टीम बनाई जाए और समाजसेवी संगठनों का सहयोग लिया जाए । ग्वालियर व्यापार मेला में 15 अप्रैल के पूर्व जो दुकानदार अपनी मर्जी से जाना चाहता है, उसे ब्लेक लिस्टेट नहीं किया जाए और उसे अगले वर्ष आयोजित होने वाले मेला के लिए दुकान आवंटित की जाए । दुकानदार जितनी अवधि पूर्व मेला छोड़कर जा रहा है, उतनी अवधि के बिल की राशि उसे वापिस की जाए । इसके साथ ही, मास्क नहीं पहनने वाले व्यक्ति का चालान के साथ-साथ उसका मोबाइल नं. लिया जाए और अगले दिन कोई सफाई अभियान चलाकर दो घंटे श्रमदान के लिए भी कहाँ जाए । इस अवसर पर ऊर्जा मंत्री-माननीय श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहाकि सुरक्षा हमारे लिए प्राथमिकता है, लेकिन व्यापारी की भी उतनी ही चिंता की जानी चाहिए क्योंकि कोरोनाकाल में सबसे ज्यादा व्यापारी व श्रमिक ही आर्थिक रूप से प्रभावित हुए हैं । इसलिए उनके हितों को संरक्षित करते हुए एक सर्वमान्य निर्णय लिया जाना चाहिए ।

शहर विकास में ‘सेण्ड स्टोन’ का उपयोग किया जाए ः एमपीसीसीआई ग्वालियर, 18 मार्च । ग्वालियर के विश्‍व प्रसिद्ध सेण्ड स्टोन को बढ़ावा देने के लिए एमपीसीसीआई द्वारा केन्द्रीय मंत्री-माननीय श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, सांसदद्वय-माननीय श्री विवेकनारायण शेजवलकर एवं श्रीमंत ज्योतिरादित्य जी सिंधिया सहित आयुक्त, नगर-निगम, ग्वालियर एवं सीईओ, ग्वालियर स्मार्ट सिटी डेव्लपमेंट कॉर्पोरेशन को पत्र लिखकर माँग की है कि ग्वालियर में नगर-निगम एवं स्मार्ट सिटी डेव्लपमेंट कॉर्पोरेशन सहित ‘साडा’ द्वारा किए जाने वाले निर्माण कार्यों में अधिकतर लाल पत्थर का उपयोग किया जाता है, जो कि बाहर (राजस्थान) से आता है, जबकि ग्वालियर, ‘सेण्ड स्टोन’ का एक बहुत बड़ा निर्यातक है और यह उच्च गुणवत्ता का है । बावजूद इसके शहर विकास में ‘सेण्ड स्टोन’ का उपयोग नहीं होने से स्थानीय कारोबारियों को शासन स्तर पर आर्थिक लाभ नहीं मिल पा रहा है । एमपीसीसीआई के अध्यक्ष-विजय गोयल, संयुक्त अध्यक्ष-प्रशांत गंगवाल, उपाध्यक्ष-पारस जैन, मानसेवी सचिव-डॉ. प्रवीण अग्रवाल, मानसेवी संयुक्त सचिव-ब्रजेश गोयल एवं कोषाध्यक्ष-वसंत अग्रवाल ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति में कहा है कि ग्वालियर के सेण्ड स्टोन के कारोबार को बढ़ावा देने की दृष्टि से नगर-निगम एवं स्मार्ट सिटी डेव्लपमेंट कॉर्पोरेशन सहित ‘साडा’ द्वारा किए जाने वाले विकास कार्यों में ‘लोकल फॉर वोकल” नारे पर अमल करते हुए, ‘सेण्ड स्टोन’ का इस्तेमाल किया जाए, ताकि ‘सेण्ड स्टोन’ के कारोबार से जुड़े हुए स्थानीय उद्यमी लाभांवित हो सकें ।

लाइफ टाइम डायवर्सन शुल्क जमा करने हेतु नीति बनाई जाए ः एमपीसीसीआई डायवर्सन शुल्क की वसूली के संबंध में प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री, केन्द्रीय मंत्री-माननीय श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, सांसदद्वय-माननीय श्री विवेक नारायण शेजवलकर एवं माननीय श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित ऊर्जा मंत्री-माननीय श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को लेखे पत्र ग्वालियर, 18 मार्च । भूमि/भवन स्वामियों की ‘डायवर्सन शुल्क’ को लेकर आ रहीं परेशानियों को ध्यान में रखते हुए, एमपीसीसीआई द्वारा प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री-श्री शिवराज सिंह चौहान, राजस्व मंत्री-माननीय श्री गोविन्द सिंह राजपूत, केन्द्रीय मंत्री-माननीय श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, सांसदद्वय-माननीय श्री विवेक नारायण शेजवलकर एवं माननीय श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित ऊर्जा मंत्री-माननीय श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को पत्र लिखकर, माँग की है कि ऐसे भूमि/भवन स्वामी जो एक मुश्त ‘डायवर्सन शुल्क’ जमा कर प्रति वर्ष डायवर्सन शुल्क जमा करने से मुक्ति चाहते हैं, उन सभी भूमि/भवन स्वामियों के लिए लाइफ टाइम डायवर्सन शुल्क जमा करने हेतु नीति बनाई जाए । एमपीसीसीआई के अध्यक्ष-विजय गोयल, संयुक्त अध्यक्ष-प्रशांत गंगवाल, उपाध्यक्ष-पारस जैन, मानसेवी सचिव-डॉ. प्रवीण अग्रवाल, मानसेवी संयुक्त सचिव-ब्रजेश गोयल एवं कोषाध्यक्ष-वसंत अग्रवाल ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति में कहा है कि यह शाश्‍वत सत्य है कि प्रदेश के सभी शहरी क्षेत्रों का तीव्र गति से विगत् कुछ वर्षों में काफी विस्तार हुआ है, परन्तु राज्य शासन द्वारा नगर-निगम एवं नगर पंचायतों की बढ़ी हुई सीमाओं को आवासीय क्षेत्र घोषित नहीं किए जाने से आए दिन शहर में राजस्व विभाग (कलेक्ट्रेट) के अधिकारियों द्वारा किसी भी भवन स्वामी के यहाँ पहुँच कर डायवर्सन शुल्क वसूली की कार्यवाही प्रारम्भ कर दी जाती है । पदाधिकारियों ने कहा है कि एमपीसीसीआई की यह मंशा कतई नहीं है कि शासन को राजस्व की प्राप्ति नहीं हो, परन्तु शासन द्वारा राजस्व उस भंवरे की तरह वसूल किया जाए, जिस तरह भंवरा फूल का रस भी चूसता है, लेकिन फूल की सुगंध और सुंदरता को कतई प्रभावित नहीं होने देता है । इसलिए शासन से माँग है कि जो भूमि/भवन स्वामी एक मुश्त ‘डायवर्सन शुल्क’ जमा कर प्रति वर्ष डायवर्सन शुल्क जमा करने से मुक्ति चाहते हैं, ऐसे भूमि/भवन स्वामियों को लाइफ टाइम डायवर्सन शुल्क जमा करने हेतु नीति बनाई जाए । साथ ही, प्रदेश के सभी शहरी क्षेत्रों में हुए विस्तार के क्षेत्रफल को आवसीय घोषित किया जाए । इसके साथ ही ः- * जिन भूमि/भवन पर डायवर्सन जमा नहीं हुआ है, उन भूमि भवन का डायवर्सन नवीन संशोधन के मुताबिक किया जाए । * जो भूमि/भवन स्वामी डायवर्सन का पुनः निर्धारण कराना चाहते हैं, उनके डायवर्सन पुनः निर्धारित किए जाएं । * जो भूमि/भवन मास्टर प्लान के अनुसार उपयोग हो रहे हैं, ऐसी भूमि/भवन को डायवर्ट ग्राम तथा नगर निवेश ने किया है, उस पर डायवर्सन शुल्क नहीं वसूला जाए ।

कलेक्टर गाइडलाइन में किसी भी प्रकार की वृद्घि न की जाए : एमपीसीसीआई वर्ष 2021-22 के लिए प्रस्तावित कलेक्टर गाइडलाइन पर भेजीं आपत्तियां ग्वालियर 17 मार्च| मध्यप्रदेश चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री(एमपीसीसीआई) द्बारा आज वर्ष 2021-22 के लिए प्रस्तावित कलेक्टर गाइडलाइन पर आपत्तियां कलेक्टर एवं अध्यक्ष जिला मूल्यांकन समिति तथा वरिष्ठ जिला पंजीयक को प्रेषित कर मांग की है कि कलेक्टर गाइडलाइन में किसी भी प्रकार की वृद्घि नहीं की जाए| एमपीसीसीआई अध्यक्ष-विजय गोयल, संयुक्त अध्यक्ष-प्रशांत गंगवाल, उपाध्यक्ष-पारस जैन, मानसेवी सचिव-डॉ. प्रवीण अग्रवाल, मानसेवी संयुक्त सचिव-ब्रजेश गोयल एवं कोषाध्यक्ष-वसंत अग्रवाल द्बारा प्रेस को जारी विज्ञप्ति में अवगत कराया गया है कि कोरोना काल के चलते व्यापार एवं उद्योग की स्थिति बहुत दयनीय है, इसलिए कलेक्टर गाइडलाइन में किसी भी प्रकार की वृद्घि नहीं की जाना चाहिए| मध्यप्रदेश चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री(एमपीसीसीआई) द्बारा कलेक्टर गाइडलाइन पर निम्नलिखित आपत्तियां प्रेषित की गई हैं:- 1. भारत वर्ष में व्याप्त मंदी खासकर मध्यप्रदेश की मंदी को ध्यान में रखते हुए विगत वर्ष 2019 में मध्यप्रदेश सरकार द्बारा एक व्यवहारिक निर्णय लिया जाकर गाइडलाइन में 20 प्रतिशत की कमी की गई थी जिसको प्रदेश की जनता ने बहुत सराहा था और तत्समय की सरकार को बहुत लोकप्रियता हासिल हुई थी| परिणामत: मध्यप्रदेश सरकार के पंजीयन शुल्क में आशातीत वृद्घि हुई और रियल एस्टेट के व्यापार में हलचल बढी थी जिसकी वजह से लोगों को रोजगार, व्यापार और आवास की उपलब्धता में यह निर्णय स्वर्णिम निर्णय के रूप में जाना जा रहा था| अब आपके द्बारा सरकार की उस मंशा के विपरीत जिस तरह की वृद्घि प्रस्तावित की गई है अगर यह निर्णय हुआ तो म.प्र. में रियल एस्टेट के कारोबार में बड़ा अवरोधक पैदा होगा| वर्तमान कोरोनाकाल में वैसे ही पिछले एक वर्ष से व्यापार-उद्योग की स्थिति बहुत दयनीय है| आपका यह निर्णय सरकार की छवि को भी धूमिल करेगा| अत: म.प्र. के आर्थिक विकास को ध्यान में रखते हुए यह बहुत आवश्यक है कि गाइडलाइन की दरों में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न की जाये| 2. जहां-जहां भूखण्ड की दर आवासीय व गैर आवासीय समान हैं अर्थात् वह जगह पूर्ण रूप से गैर आवासीय है तब ऐसी स्थिति में उस स्थान पर प्रकोष्ठ के रूप में भी आवासीय दरों को निर्धारित नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि ऐसा करके एक भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है और जहां पर भूखण्ड की दर आवासीय एवं गैर आवासीय दोनों समान रखी हैं तब यह स्पष्ट है कि वहां आवासीय गतिविधियां कम संचालित होती हैं| अत: जिस एरिया में आवासीय दरों को बढाकर गैर आवासीय समान किया हुआ है उन जगहों पर प्रकोष्ठ की भूमि में आवासीय दर शून्य होना चाहिए| 3. वर्तमान में कृषि भूमि क्रय किये जाने पर 1000 मीटर का स्लैब लगाकर शहरी क्षेत्र में प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से मूल्यांकन किया जाता है, उसके बाद अगले 3000 वर्ग मीटर पर कृषि भूमि के दोगुनी दर से मूल्यांकन किया जाता है| यह प्रावधान व्यवहारिक रूप से बहुत गलत है और खासकर जो कोई बड़ा बिल्डर/निवेशक कॉलोनियां अथवा अन्य गतिविधि के लिए भूमि क्रय करता है तब उसके प्रोजेक्ट की भूमि की वास्तविक दर वर्तमान गाइडलाइन से कम होती है और उसको अव्यवहारिक प्रावधान की वजह से उसकी आर्थिक लागत भी बढती है| यह प्रावधान छोटी-छोटी उन जगहों के लिए तो ठीक हो सकता है जहां पर अनाधिकृत रूप से कॉलोनियां काट दी जाती हैं लेकिन जो बड़े निवेशक बड़ी भूमि पर संपूर्ण प्रावधानों के बाद प्रोजेक्ट को लाना चाहते हैं तब यह प्रावधान उनके निर्णय में बाधा उत्पन्न करता है, जिससे बड़े निवेशक ग्वालियर की ओर आकर्षित नहीं होते हैं| अत: 4000 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र की कृषि भूमि की रजिस्ट्री होने पर सम्पूर्ण क्षेत्र पर कृषि भूमि हेतु निर्धारित हैक्टेयर की दर से ही गणना की जाना चाहिए| 4. ग्वालियर जिले में पंजीयन एवं मुद्रांक शुल्क में से 0.8% पंजीयन शुल्क के रूप में लिया जाता है| यह पंजीयन शुल्क दस्तावेजों के लंबे समय तक रखरखाव के लिए लिया जाता है जबकि अन्य प्रदेशों में यह एक निश्‍चित राशि के रूप में निर्धारित है लेकिन ग्वालियर जिले में यह विक्रय मूल्य पर 0.8% लिया जाता है| इससे बड़े प्रोजेक्ट पर बड़ा आर्थिक भार पड़ता है और कोई बड़ा निवेशक जब अन्य प्रदेशों की तुलना में ग्वालियर महानगर को शामिल करके अपने प्रोजेक्ट का अध्ययन करता है तो ग्वालियर जिला पिछड़ जाता है, जिससे बड़ा निवेशक ग्वालियर में अपने निवेश से पीछे हट जाता है| इसलिए पंजीयन शुल्क को प्रतिशत से हटाकर अधिकतम राशि इसकी तय की जाना चाहिए| 5. इस बार की प्रस्तावित गाइड लाइन में कृषि भूमि की अवधारणा को बदलते हुए ग्राम ही हटा दिये गये हैं| इसकी वजह से शहर का जो फैलाव हो रहा है, वह रूकेगा| ग्वालियर के विकास के लिए बहुत आवश्यक है कि यह विकास गांव की तरफ जाये और यदि यहां पर स्थित कृषि भूमि की आवासीय और गैर आवासीय दरें निर्धारित की जायेंगी तो ग्वालियर के विकास का फैलाव नहीं होगा| यह और महत्वपूर्ण हो जाता है जबकि नगर निगम सीमा में ६ वार्ड ग्रामीण के शामिल हुए हैं| 6. इतने बड़े आमूल-चूल परिवर्तन जो प्रस्तावित किये गये हैं उसको बिना विस्तार से चर्चा कराए निर्णय लेना विकास विरोधी होगा और ग्वालियर के संबंध में जबकि ग्वालियर विकास की रेस में दौड़ने को तैयार है तब यह निर्णय उसके पैरों में बेड़ियां बांधने जैसा होगा| यहां स्पष्ट है कि यह दरें 13 मार्च,21 को जिला प्रशासन द्बारा बैठक कर, तय की गईं और 17 मार्च आपत्ति की अंतिम दिनांक निर्धारित की है जिससे प्रतीत होता है कि यह योजनाबद्घ तरीके से मनमाने निर्णय को लिये जाने के लिये किया गया है| यदि ऐसा होता है तो आवश्यकता पड़ने पर इस निर्णय के विरूद्घ जनआंदोलन भी किया जायेगा| एमपीसीसीआई ने मांग की है कि वर्ष 2021-22 के लिए कलेक्टर गाइडलाइन में किसी भी प्रकार की वृद्धि न की जाये ताकि रियल एस्टेट कारोबार में कोरोनाकाल के बाद जो थोड़ी सी हलचल हुई है, उसे तेजी प्रदान की जा सके|

ग्वालियर के व्यवसाईयों के बगैर किसी कारण के जीएसटी पंजीयन निरस्त किए जाने के विरोध में केन्द्रीय वित्तमंत्री-माननीया श्रीमती निर्मला सीतारमण एवं केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री-माननीय श्री अनुराग ठाकुर को लिखे पत्र ग्वालियर, 17 मार्च । ग्वालियर शहर के अनेक व्यवसाईयों के बगैर किसी कारण के जीएसटी रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिए जाने पर आज एमपीसीसीआई द्वारा केन्द्रीय वित्तमंत्री-माननीया श्रीमती निर्मला सीतारमण एवं केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री-माननीय श्री अनुराग ठाकुर को पत्र लिखकर, व्यवसाईयों के निरस्त किए गए जीएसटी पंजीयनों को पुनः बहाल किए जाने की माँग की गई है । एमपीसीसीआई के अध्यक्ष-विजय गोयल, संयुक्त अध्यक्ष-प्रशांत गंगवाल, उपाध्यक्ष-पारस जैन, मानसेवी सचिव-डॉ. प्रवीण अग्रवाल, मानसेवी संयुक्त सचिव-ब्रजेश गोयल एवं कोषाध्यक्ष-वसंत अग्रवाल ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति में अवगत कराया है कि जीएसटी विभाग द्वारा बगैर किसी कारण के स्थानीय व्यवसाईयों के निरस्त किए गए पंजीयनों पर रोष व्यक्त करते हुए आज एमपीसीसीआई द्वारा माननीय केन्द्रीय वित्त मंत्री एवं केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री से ग्वालियर के ऐसे सभी व्यवसाई जिनका बगैर किसी कारण के जीएसटी रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिए गए हैं । उन सभी जीएसटी पंजीयनों की पुनः बहाली हेतु संबंधित अधिकारियों को आदेशित करने की माँग की गई है, ताकि स्थानीय व्यवसाईयों को हो रही परेशानी से राहत मिल सके और वह अपना कारोबार बगैर किसी परेशानी के सुचारू रूप से संचालित कर सकें । केन्द्रीय मंत्रीद्वय को प्रेषित पत्रों में उल्लेख किया गया है कि कोविड-19 के कारण देशभर में लागू किए गए लॉकडाउन के परिणाम स्वरूप आर्थिक गतिविधियाँ पूरी तरह से ठप्प हो गई थी और इसके दुस्प्रभाव अभी तक सामने आ रहे हैं । कारोबारी अभी तक लॉकडाउन के दुस्प्रभावों से बाहर नहीं आ पाए हैं । बावजूद इसके जीएसटी विभाग द्वारा ग्वालियर के कई व्यवसाईयों के जीएसटी रजिस्ट्रेशन, निरस्त किया जाना, अत्यन्त ही दुर्भाग्यपूर्ण कार्यवाही है क्योंकि एक ओर केन्द्र सरकार उद्योग व व्यापार को बढ़ावा देने की बात कर रही है और वहीं दूसरी ओर ऐसे व्यवसाई जो कि विगत् काफी वर्षों से कारोबार कर रहे हैं, उनका बगैर किसी उचित कारण के जीएसटी रजिस्ट्रेशन को निरस्त किया जाना, समझ से परे एवं औचित्यहीन है । पदाधिकारियों ने कहा है कि जीएसटी पंजीयन निरस्त होने से व्यवसाई काफी परेशान हैं । इस संबंध में जब व्यवसाईयों द्वारा स्थानीय अधिकारियों से बात की गई, तब उनका कहना था कि किस कारण जीएसटी रजिस्ट्रेशन निरस्त हुए हैं, यह बता पाना संभव नहीं है और जब व्यवसाईयों द्वारा अपने जीएसटी रजिस्ट्रेशन को पुनः बहाल किए जाने की बात कही गई, तो जीएसटी अधिकारियों ने कहाकि यह हमारे बूते के बाहर है ।

उपभोक्ताओं की समस्याओं का निराकरण प्राथमिकता से करें : श्री विनोद कटारे, महाप्रबंधक शहर वृत्त चेम्बर भवन में विद्युत समस्या निवारण शिविर सम्पन्न ग्वालियर 15 मार्च| मध्यप्रदेश चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री में आज मासिक विद्युत समस्या निवारण शिविर का आयोजन किया गया| इस अवसर म.प्र. मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के महाप्रबंधक शहर वृत्त-श्री विनोद कटारे, उत्तर संभाग के उपमहाप्रबंधक-श्री अमरेश शुक्ला, दक्षिण संभाग के उपमहाप्रबंधक-श्री राहुल साहू, सेन्ट्रल डिवीजन के उपमहाप्रबंधक-श्री राजकुमार मालवीय आदि अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित थे| शिविर के प्रारंभ में विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों का बुके देकर स्वागत किया गया| शिविर का संचालन कर रहे मानसेवी सचिव डॉ. प्रवीण अग्रवाल ने कहा कि नगर निगम सीमा का विस्तार होकर वार्ड 61 से 66 हो गये हैं, परंतु वितरण कंपनी के शहर वृत्त में अभी वार्ड 60 तक के उपभोक्ता ही आते हैं| इसलिए निगम सीमा में शामिल हुए नये 6 वार्डों के उपभोक्ताओं को भी शहर वृत्त में शामिल किया जाये, ताकि उपभोक्ता को निर्वाध विद्युत आपूर्ति प्राप्त होकर समस्याओं का निराकरण शीघ्रता से हो सके| शिविर में एक ही परिसर में दूसरा घरेलू कनेक्शन नहीं दिये जाने की शिकायत लेकर भी कई उपभोक्ता आये परंतु नवीन नियमानुसार ऐसे उपभोक्ताओं को कनेक्शन नहीं दिये जा रहे हैं| म.प्र. चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री द्बारा शासन से मांग की है कि यदि वास्तविक आधार पर नवीन कनेक्शन की डिमांड आती है तो उसे दिया जाना चाहिए| चेम्बर इसके लिए शासन स्तर पर प्रयास करेगा| शिविर में 12 साल पुराने प्रकरण का निराकरण कर, उपभोक्ता को राहत प्रदान की गई| साथ ही कई उपभोक्ताओं की शिकायतों का मौके पर ही निराकरण किया गया| शिविर में करीब १०० विद्युत उपभोक्ताओं की शिकायतें प्राप्त हुईं| म.प्र. मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के महाप्रबंधक (शहर वृत्त)-श्री विनोद कटारे ने सभी डिवीजन के उपमहाप्रबंधक को निर्देशित किया कि शिविर में आये विद्युत उपभोक्ताओं का निराकरण प्राथमिकता से करें| वहीं ऐसे प्रकरण जिनका निराकरण मौके पर संभव नहीं हो सका है, उनका निराकरण ३१ मार्च तक आवश्यक रूप से कर, चेम्बर ऑफ कॉमर्स को रिपोर्ट प्रेषित करें ताकि उपभोक्ताओं की शिकायतें शीघ्रता से दूर हो सकें| वहीं जोन कार्यालय पर उपभोक्ता के साथ बेहतर व्यवहार रहे, यह सुनिश्‍चित करने के निर्देश भी दिये| शिविर का संचालन एवं आभार-मानसेवी सचिव-डॉ. प्रवीण अग्रवाल द्बारा किया गया| शिविर में कोषाध्यक्ष-वसंत अग्रवाल, सदस्य-दीपक जैन, राजा श्रीवास्तव, अनिल कुमार गोयल आदि सहित काफी संख्या में विद्युत उपभोक्ता उपस्थित रहे|

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